15 अगस्त 2015 - 14:08
इस्लाम, सुलह और प्यार का नाम है।

हसन रूहानी ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि पूर्व और पश्चिम की साम्राज्यवादी शक्तियां धर्म, नैतिकता और आसमानी शिक्षाओं को दुनियावी राजनीति से कोसों दूर और इंसान के विकास में बड़ी बाधा समझती थीं उन्होंने कहा कि इमाम खुमैनी र.अ. ने इस सोच को समाप्त कर धर्म को ऐन राजनीति करार दिया और दुनिया वालों के लिए यह साबित कर दिया कि धर्म केवल दुआ, इबादत, रोज़ा व हज का नाम नहीं बल्कि यह इलाही धर्म पूरी दुनिया पर राज करने की क्षमता रखता है।

अहलेबैत (अ) न्यूज़ एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार विश्व अहलेबैत परिषद के छठे सत्र के उद्घाटन समारोह और इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम पर विश्व सम्मेलन में बोलते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने इस सम्मेलन में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा: यह बैठक ऐसे हालात मंं आयोजित की जा रही है कि मध्यपूर्व के मुसलमान अत्यंत भयानक परिस्थितियों से जूझ रहे हैं।
हुज्जतुलइस्लाम वल मुस्लेमीन हसन रूहानी ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि पूर्व और पश्चिम की साम्राज्यवादी शक्तियां धर्म, नैतिकता और आसमानी शिक्षाओं को दुनियावी राजनीति से कोसों दूर और इंसान के विकास में बड़ी बाधा समझती थीं उन्होंने कहा कि इमाम खुमैनी र.अ. ने इस सोच को समाप्त कर धर्म को ऐन राजनीति करार दिया और दुनिया वालों के लिए यह साबित कर दिया कि धर्म केवल दुआ, इबादत, रोज़ा व हज का नाम नहीं बल्कि यह इलाही धर्म पूरी दुनिया पर राज करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने इस्लामी क्रांति की सफलता से पूरे क्षेत्र में पैदा होने वाले परिवर्तन का वर्णन करते हुए कहा कि आज जो सुपर पावर शक्तियों के मुक़ाबले में कम ताक़त के साथ क्षेत्र की कौमें डटी हुई नजर आती हैं यह जो सोवियत संघ की लाल सेना के मुक़ाबिले में अफ़गानिस्तान की सफलता, पूरे मध्य पूर्व में इस्लामी विचार और सोच का जिंदा होना, मध्य एशिया की मस्जिदों से अज़ान की आवाज़ें, यहूदी सरकार के सामने लेबनानी जनता की दृढ़ता, तुर्की और उत्तरी अफ्रीका में इस्लामी आंदोलन और आखिरकार पूरे इस्लामी जगत में इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन नज़र आता है यह आंदोलन हज़रत इमाम खुमैनी (रह) के नेतृत्व में इस्लामी क्रांति की सफलता से शुरू हुआ और आज भी जारी है यह इमाम खुमैनी (रह) के प्रभाविक नेत्रत्व और वैश्विक इस्लामी आंदोलन का परिणाम है।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस्लामी जगत में फैली हुई इस्लामी क्रांति की लहर यह बता रही है कि इस्लाम, क़ौम व जनजाति या खून और भौगोलिक सीमाओं के आधार पर स्थापित सीमाओं का कायल नहीं है बल्कि इस्लाम केवल ईमान और आस्था की सीमा को स्वीकार करता है ।
उन्होंने कहा कि इस्लाम की आवाज बंदूक की गोली से दुनिया वालों तक नहीं पहुंची बल्कि मस्जिदों, मिनारों, मदरसों और आध्यात्मिक समारोहों से लोगों के दिलों तक पहुंची है।
उन्होंने इस्लाम के शुरुआती दौर में यहूदी व ईसाई के साथ पैगम्बर (अ) के माध्यम से बांधे गए अहद व पैमान की ओर इशारा किया और कहा: इस्लाम वही धर्म है जिसने कुफ़्फ़ार व मुशरेकीन और यहूदी व ईसाईयों के साथ भी अहद व पैमान बांधे और पैगम्बर (स।) ने उन्हें वफ़ा किया।
डॉक्टर हसन रूहानी ने कहा: इस्लाम के पास तलवार है लेकिन इस्लाम सिवाये जरूरत के तलवार का उपयोग नहीं करता क्योंकि यह धर्म सुलह और प्यार का धर्म है और बुद्धि और तर्क के आधार पर बात करता है।
उन्होंने इस बात का वर्णन करते हुए कि इस्लाम और कुरआन की वास्तविक व्याख्या खुद अहलेबैत (अ) हैं उन्होंने कहा कुछ लोग मनगढ़ंत बातों को लेकर क्षेत्र में फूट का बिगुल बजाते हैं जबकि अहलेबैत (अ) मुसलमानों के बीच एकता का केंद्र हैं और इमाम ख़ुमैनी ने भी हमें यही सिखाया है कि अहलेबैत (अ) के साए में शिया सुन्नी सब एक दूसरे के साथ रहें और आपस में भाई की तरह जीवन गुजारें।
राष्ट्रपति ने मौजूदा दौर में मुहब्बत और प्यार से भरे धर्म को हिंसा और घृणा में बदल किए जाने वाली दुश्मनों के षड्यंत्र की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुरआन में असली चीज प्रतिरक्षा है और जेहाद का हुक्म दूसरी श्रेणी की हैसियत रखता है हमें कभी इस इस्लाम को जो सभी इंसानों यहां तक जानवरों और अन्य प्राणियों के अधिकारों का रक्षक है और इंसाफ का वाहक है चरमपंथी और यहूदी षड्यंत्र का शिकार नहीं होने देना है।
उन्होंने इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम पर विश्व सम्मेलन के संबंध में चर्चा कर आपकी सीरत के मुख्य पहलुओं की ओर इशारा किया और कहा कि आशूरा की घटना के बाद इस्लामी दुनिया को जिस आतंक और निराशा और दुख ने घेर रखा था केवल इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम का व्यक्तित्व ही इन स्थितियों से उसे निकाल सकता था। आपने फिर से नैतिकता और आध्यात्मिकता को कमाल तक पहुंचाया और समाज को एक नई उम्मीद दी। उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिन मानव अधिकारों की राग अलापे हुए है इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने अपनी किताब “रिसालतुलहुक़ूक़” में हर रिश्ते के अधिकारों का वर्णन किया है।
उन्होंने कहा कि इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने उस क्रूर दौर में जहां शिक्षा देना असंभव था दुआ की शैली में इस्लामी शिक्षाओं को दुनिया वालों तक स्थानांतरित कर दिया यह वह महान उपलब्धि है, जो हर किसी के बस की बात नहीं ।
उन्होंने आखिर में विश्व अहलेबैत परिषद के सम्मेलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि विश्व अहलेबैत परिषद के सदस्यों का इस सम्मेलन के आयोजन करने का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सुलह और आपसी एकता की स्थापना और अहलेबैत (अ ) की शिक्षाओं से और अधिक परिचित कराना है।
उन्होंने अंत में कहा हमारे लिए यमन, इराक़, लेबनान और सीरिया के शिया और सुन्नी सब बराबर हैं और हम सब के लिए शांति और सुरक्षा और भाईचारे के इच्छुक हैं।
गौरतलब है कि विश्व अहलेबैत परिषद की जनरल असेम्बली का छठा सम्मेलन आज तेहरान में राष्ट्रपति के भाषण से शुरू हुआ इसमें कम से कम 1000 प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया है।